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Chandauli News : किसानों को लागत के अनुसार मिलेगा केसीसी ऋण

- कृषि, मत्स्य, पशुपालन सहित अन्य क्षेत्रों के लिए वित्तमान अनुमोदित

चंदौली। कलेक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग की अध्यक्षता में वर्ष 2026-27 की जिला स्तरीय तकनीकी समिति की बैठक हुई। इसमें विभिन्न फसलों, मत्स्य पालन, पशुपालन, रेशम कीट पालन तथा मधुमक्खी पालन कार्यक्रमों के सुचारू रूप से संचालन के लिए उसकी लागत के अनुसार संस्थागत वित्त की व्यवस्था के लिए वर्ष 2026-27 के वित्तमान का अनुमोदन जिला स्तरीय तकनीकी समिति की ओर से किया गया।

जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव ने बताया कि कतिपय निवेशों के मूल्य में सीमान्त वृद्धि के दृष्टिगत गत वर्ष की अपेक्षा वर्तमान वित्तमान में 1.1 प्रतिशत् (सनई/दैचा) से लेकर 4.5 प्रतिशत् (धान) तक की वृद्धि प्रस्तावित की गई है।

औद्यानिक फसलो के वित्तमान में जिला उद्यान अधिकारी की ओर से 3.0 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित की गई। सहायक निदेशक मत्स्य ने वर्ष 2025-26 के वित्तमान रू0-4.00 लाख प्रति हे० के सापेक्ष इस वर्ष 2026-27 के लिए रू0-400000.00 का वित्तमान स्थिर रखने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। मधुमक्खी पालन के लिए जिला उद्यान अधिकारी ने 50 मौन गृहों के लिए वित्तमान को वर्ष 2026-27 की दर रू0-265225.00 पर 3.0 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

रेशम विभाग की ओर से शहतूत सिल्क पालन के लिए वित्तमान की दर वर्ष 2025-26 के स्तर पर वर्ष 2026-27 में भी प्रति एकड़ रू०-3.00 लाख पर स्थिर रखने का सुझाव दिया गया। पशुपालन विभाग द्वारा गाय पालन में 4.4 प्रतिशत्, भैंस पालन में 0.9 प्रतिशत्, भेड़ / बकरी पालन में वर्ष 2025-26 में 7920 के सापेक्ष वर्ष 2026-27 में 6930 जो कि 12.5 प्रतिशत् की कमी, सुकर पालन में वर्ष 2025-26 में 9990 के सापेक्ष वर्ष 2026-27 में 8280 जो की 17.1 प्रतिशत् कम करने का प्रस्ताव है तथा मुर्गी पालन को वर्ष 2025-26 के वित्तमान 760.5 रू0 पर स्थिर रखने का प्रस्ताव दिया गया है।

जिलाधिकारी ने बताया कि वित्तमान के निर्धारण से एक ओर जहां कृषकों की उत्पादन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्याप्त वित्तीय व्यवस्था अपेक्षित होती है वही पर फसल बीमा के प्रीमियम का भार अधिक न पड़े तथा कृषक, ऋणजाल में ना फसें इसका भी ध्यान देना आवश्यक होता है। कृषकों से अपेक्षा की गयी कि जिन कृषकों द्वारा फसल का बीमा कराया गया है वह ओलावृष्टी, अतिवर्षा व कटाई के उपरान्त 14 दिनों के अन्दर खेत में फसल में क्षति होने की स्थिति में निर्धारित समयावधि में फसल बीमा कम्पनी के हेल्प लाइन नंबर- 14447 एवं उप कृषि निदेशक,को सूचित करें ताकि नियमानुसार कार्यवाही की जा सके। उप कृषि निदेशक, डीडीएम नाबार्ड, , सहायक निदेशक मत्स्य, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी व प्रगतीशील किसान वीरेन्द्र सिंह, रमेश सिंह आदि उपस्थित थे।

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