
चंदौली। जिला कांग्रेस कमेटी चंदौली ने निर्माणाधीन परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष अरुण द्विवेदी के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। यह विरोध प्रदर्शन विशेष रूप से कटसिला रेलवे क्रॉसिंग पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज के गिरने की घटना को लेकर आयोजित किया गया, जिसे कांग्रेस ने लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम बताया।
इस दौरान उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ‘मुन्ना’ ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से विकास कार्यों के नाम पर भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चंदौली और वाराणसी समेत देश के कई हिस्सों में निर्माणाधीन ओवरब्रिजों के गिरने, सड़कों के धंसने और पानी की टंकियों के ढहने जैसी घटनाएं घटिया निर्माण गुणवत्ता और भ्रष्टाचार का स्पष्ट प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं से आम जनता में भय का माहौल है और लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
जिलाध्यक्ष अरुण द्विवेदी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कटसिला क्षेत्र के बनौली खुर्द में ओवरब्रिज का गिरना कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश और देश में व्याप्त अव्यवस्था का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।
कांग्रेस नेताओं ने इस दौरान चार सूत्रीय मांगें प्रशासन के सामने रखीं। इनमें प्रमुख रूप से चंदौली जिले में रेलवे क्रॉसिंगों पर बन रहे सभी ओवरब्रिजों की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग शामिल है। साथ ही जिले से गुजरने वाले सभी राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता की जांच, निर्माणाधीन ओवरब्रिजों की तकनीकी समीक्षा तथा चंदौली से सैयदराजा और पड़ाव से चहनियां तक बन रहे मार्गों की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की गई।
कार्यकर्ताओं का कहना था कि यदि समय रहते इन निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो भविष्य में बड़े हादसे हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो कांग्रेस पार्टी व्यापक जनआंदोलन करने को बाध्य होगी। धरना-प्रदर्शन में बृजेश गुप्ता, मधु राय, रजनीकांत पांडेय, महेंद्र सिंह, गंगा प्रसाद, तरुण पांडेय, सतीश बिंद, राजेंद्र गौतम, दयाराम पटेल, राममूरत गुप्ता, गुलाब राम, शिवेंद्र मिश्रा, श्रीकांत पाठक, चंद्रवंश यादव, प्रिंस मिश्रा, अमरदेव राम, इंद्रजीत मिश्रा, मुकेश नंदन, राजकिशोर सिंह, राकेश सिंह, योगेंद्र सिंह, अविनाश विश्वकर्मा, प्रकाश मिश्रा, पवन पासवान, जगदीश यादव, पंकज तिवारी, दिलीप गुप्ता, संतोष चौबे, शमशेर खान, दिलीप पाल, संतोष प्रसाद सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

