
संवाददाता – बाबू चौहान
चंदौली। शिकारगंज क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था दिन-ब-दिन बदहाल होती जा रही है। वर्ष 1955 में निर्मित भोका बांध से निकलने वाली माइनर नहरें आज अतिक्रमण और रखरखाव के अभाव में लगभग सूख चुकी हैं। शिकारगंज–करवदिया–पिपरखणिया तथा बलिया-जोगिया-भगड़ा-गायघाट-सुर्धापुर माइनर की जर्जर हालत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। नहरों से समय पर पानी न मिलने के कारण फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
किसानों का आरोप है कि बीते करीब 20 वर्षों से न तो नहर का विधिवत सिमांकन कराया गया और न ही मरम्मत या लाइनिंग का कोई ठोस कार्य हुआ। प्रशासनिक उपेक्षा के चलते नहर की पटरियों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो गया है। कई स्थानों पर नहर की पटरी काटकर उसे खेतों में मिला लिया गया, जिससे नहर की चौड़ाई और गहराई दोनों ही प्रभावित हुई हैं। परिणामस्वरूप जलधारण क्षमता घटती चली गई।
भोका बांध से निकलने वाली दो प्रमुख शाखा नहरें-पहली शिकारगंज से कल्यानीचक, करवदिया, कुशही होते हुए पिपरखणिया तक तथा दूसरी बलिया, जोगिया, उचहरा, लठिया, अमरा होते हुए भगड़ा, गायघाट और सुर्धापुर तक-पूरी तरह उपेक्षित अवस्था में हैं। स्थिति यह हो गई है कि नहर इतनी कमजोर हो चुकी है कि पूरा पैनल खोलकर पानी छोड़ा जाना संभव नहीं रह गया है। टेल क्षेत्र के किसानों तक पानी पहुंचना तो दूर, हेड के पास स्थित खेतों को भी पर्याप्त सिंचाई जल नहीं मिल पा रहा है।
शिकारगंज पुल के दोनों ओर हुए भारी अतिक्रमण से जल प्रवाह और अधिक बाधित हो गया है। इससे खरीफ और रबी दोनों मौसम की फसलें प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। क्षेत्रीय किसानों असलम खान, सुनील सरोज, ईश्वरी शरण सिंह, रामचंद्र यादव, दशरथ यादव, रूपेंद्र चौहान सहित अन्य किसानों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि नहर का तत्काल सिमांकन कर अतिक्रमण हटाया जाए तथा मरम्मत और लाइनिंग का कार्य शीघ्र शुरू कराया जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में सिंचाई संकट और गहरा जाएगा, जिससे क्षेत्र की खेती को भारी नुकसान होगा।

